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नए तेज़ गेंदबाज़ों की गाइड: फास्ट बॉलिंग कैसे सीखें (2026)

फास्ट बॉलिंग सीखने का सही क्रम है: पहले संतुलित रन-अप, फिर सुरक्षित एक्शन, फिर ग्रिप और सीम, उसके बाद लाइन-लेंथ की सटीकता और सबसे आखिर में रफ़्तार। पिच रिपोर्ट की नज़र में भारत के नए गेंदबाज़ अक्सर उल...

3 अक्टूबर 2026 5 min read
नए तेज़ गेंदबाज़ों की गाइड: फास्ट बॉलिंग कैसे सीखें (2026)
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नए तेज़ गेंदबाज़ों की गाइड: फास्ट बॉलिंग कैसे सीखें (2026)

फास्ट बॉलिंग सीखने का सही क्रम है: पहले संतुलित रन-अप, फिर सुरक्षित एक्शन, फिर ग्रिप और सीम, उसके बाद लाइन-लेंथ की सटीकता और सबसे आखिर में रफ़्तार। पिच रिपोर्ट की नज़र में भारत के नए गेंदबाज़ अक्सर उल्टा चलते हैं, यानी पहले रफ़्तार पकड़ते हैं और फिर चोट पकड़ लेती है। पेशेवर तेज़ गेंदबाज़ आम तौर पर 140 किमी/घंटा से ऊपर डालते हैं, जबकि शोएब अख़्तर का 161.3 किमी/घंटा (2003 विश्व कप) आज भी सबसे तेज़ दर्ज गेंद है। पर शुरुआती स्तर पर 110 से 120 किमी/घंटा की सधी हुई गेंद 135 की बेकाबू गेंद से बेहतर है। ICC के नियमों में कोहनी का झुकाव 15 डिग्री तक ही मान्य है, इसलिए एक्शन की जाँच पहले दिन से कराएँ। मेरा फ़ैसला साफ़ है: शुरुआती चार हफ़्ते हर सत्र में सिर्फ़ 24 गेंदें डालें और एक तय लक्ष्य पर निशाना साधें।

कहा जाता है, "अभ्यास इंसान को परफ़ेक्ट नहीं बनाता; सही अभ्यास बनाता है।" यह वाक्य अमेरिकी कोच विंस लोम्बार्डी के नाम से मशहूर है, और तेज़ गेंदबाज़ी पर यह किसी भी दूसरे खेल से ज़्यादा सटीक बैठता है। मैं आपसे सच कहूँ तो मुझे हर बार घबराहट होती है जब कोई नया लड़का कहता है कि उसे बस 140 की रफ़्तार चाहिए। रफ़्तार एक निवेश है, और निवेशक की तरह मैं सबसे पहले पूछता हूँ: जोखिम कितना है और नुकसान कितना झेल सकते हो? पीठ का स्ट्रेस फ्रैक्चर किसी शेयर के 30 प्रतिशत गिरने जैसा है, जो महीनों की कमाई एक झटके में खा जाता है। आप शायद सोच रहे होंगे कि आप अपवाद हैं। सब यही सोचते हैं, और सब नेट्स के दूसरे हफ़्ते में कमर पकड़े बैठे मिलते हैं। इसलिए यह गाइड पाँच चरणों में चलती है: रन-अप, एक्शन, ग्रिप, लाइन-लेंथ और कसौटी पर जाँच। हर चरण में पहले फ़ैसला मिलेगा, कारण बाद में।

पाठकों के लिए एक ज़रूरी बात: यह लेख सिर्फ़ खेल-कौशल सीखने के लिए है। क्रिकेट के आधार पर पैसे लगाने की सलाह इसमें नहीं है, और ऐसा करना हो तो केवल अपनी सीमा के भीतर और ज़िम्मेदारी से करें।

अगर आप क्रिकेट की रोज़ाना जानकारी, खिलाड़ियों के आँकड़े और मैच समीक्षा एक जगह चाहते हैं, तो आगे बढ़ने से पहले इसे देख लें।

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a young fast bowler in white kit sprinting in on a sunlit practice pitch, dust rising behind his spikes

चरण 1: रन-अप कैसे बनाएँ जो रफ़्तार दे, थकाए नहीं?

रन-अप वह है जिसमें आप 8 से 15 कदमों में धीरे-धीरे गति बढ़ाकर डिलीवरी स्ट्राइड तक संतुलित पहुँचें। शुरुआती गेंदबाज़ के लिए 8 से 10 कदम काफ़ी हैं। हर गेंद पर पहला और आखिरी कदम एक ही जगह पड़ना चाहिए, वरना नो-बॉल और घुटने की चोट दोनों पीछे पड़ जाती हैं।

अब आपका गृहकार्य। पिच के पीछे ज़मीन पर दो निशान लगाइए: एक शुरुआती कदम का, दूसरा उस जगह का जहाँ से आप छलाँग (गैदर) लेते हैं। फिर एक ही निशान से लगातार 10 गेंदें डालिए और हर बार अगला पैर पॉपिंग क्रीज़ से कितना आगे या पीछे उतरा, यह नाप लीजिए। मेरा नियम है कि फैलाव 10 सेंटीमीटर से कम हो, तभी रन-अप को पक्का मानिए। इससे ज़्यादा फैलाव है तो रन-अप की लंबाई घटाइए, बढ़ाइए नहीं। यही वह बात है जो ज़्यादातर लोग उल्टी करते हैं: उन्हें लगता है कि लंबा रन-अप मतलब ज़्यादा रफ़्तार। असल में रफ़्तार गति की लय से आती है, दूरी से नहीं। एक और अनुभव की बात: एक्शन ठीक करने के पहले दो हफ़्तों में रफ़्तार 3 से 5 किमी/घंटा गिर सकती है। इसे घाटा मत समझिए, यह वह कीमत है जो आप आगे की कमाई के लिए चुका रहे हैं।

रन-अप तय करते समय इन बातों को क्रम से जाँचिए:

  1. शुरुआत हल्की जॉगिंग से करें, पहले चार कदम कुल गति का लगभग 50 प्रतिशत हों।
  2. आखिरी तीन कदमों में गति बढ़ाएँ, पर कंधे सीधे और नज़र लक्ष्य पर रखें।
  3. गैदर में पिछला पैर पिच की लाइन के समानांतर उतरे।
  4. अगला पैर सीधा और मज़बूत उतरे, यानी घुटना पूरी तरह मुड़कर ढहे नहीं।

अगर आप मैच के आँकड़े देखकर गेंदबाज़ों की लय परखना चाहते हैं, तो हमारी [Internal Link: तेज़ गेंदबाज़ों के आँकड़ों का विश्लेषण] देखें।

close-up of a bowler's front foot landing behind the popping crease on a worn turf pitch, chalk lines visible

अगले चरण में जाने से पहले, अगर आप रोज़ की क्रिकेट ख़बरें और रणनीति एक जगह पढ़ना चाहते हैं तो यहाँ से शुरू कर सकते हैं।

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चरण 2: बॉलिंग एक्शन को सुरक्षित और तेज़ कैसे बनाएँ?

सुरक्षित एक्शन वह है जिसमें कंधे और कूल्हे साइड-ऑन या सेमी-ओपन रहें, अगली बाजू ऊपर जाकर नीचे खिंचे और गेंद छोड़ते समय कोहनी का झुकाव 15 डिग्री के भीतर रहे। रीढ़ को ज़्यादा मरोड़ने वाला मिक्स्ड एक्शन चोट की सबसे बड़ी वजह है।

Wikipedia का फास्ट बॉलिंग पर लेख बताता है कि तेज़ गेंदबाज़ों में पीठ के निचले हिस्से के स्ट्रेस फ्रैक्चर की समस्या आम है, और इसका सीधा संबंध कंधों और कूल्हों के बीच अधिक घुमाव से जोड़ा जाता है। यानी एक्शन सिर्फ़ तकनीक का सवाल नहीं, सेहत का भी है। मैं यहाँ कोई रियायत नहीं दूँगा: मोबाइल से अपने एक्शन की वीडियो रिकॉर्ड कीजिए, पीछे से भी और बगल से भी, और देखिए कि अगला कंधा गेंद छोड़ने तक लक्ष्य की तरफ़ क्यों नहीं बना रहा। कोहनी के नियमों के लिए MCC के क्रिकेट के नियम और ICC की गाइडलाइन देखिए, क्योंकि 15 डिग्री की सीमा पार करना सीधे गेंदबाज़ी पर रोक तक ले जा सकता है। हाँ, आप सोचेंगे कि आपके दोस्त का एक्शन तो टेढ़ा है फिर भी वह विकेट लेता है। लेता होगा, पर उसका "रिटर्न" पीठ की कीमत पर आ रहा है।

एक्शन सुधारने के लिए तीन अभ्यास रोज़ करें:

  • दीवार के पास ड्रिल: अगली बाजू और छाती की स्थिति पक्की करने के लिए बिना गेंद के 15 दोहराव।
  • स्टैंडिंग डिलीवरी: रन-अप के बिना सिर्फ़ ऊपरी शरीर के साथ 12 गेंदें।
  • वीडियो जाँच: हर हफ़्ते एक बार, एक ही कोण से रिकॉर्डिंग।

चरण 3: ग्रिप, सीम और रिलीज़ कैसे सुधारें?

तेज़ गेंदबाज़ी की सबसे भरोसेमंद ग्रिप में पहली दो उंगलियाँ सीम के ऊपर, थोड़ी खुली, और अंगूठा नीचे सहारा देता है। गेंद हथेली में नहीं, उंगलियों में बैठनी चाहिए। रिलीज़ पर कलाई सीधी रहे ताकि सीम सीधी घूमे और स्विंग या सीम मूवमेंट मिले।

नई गेंद की सीम में छह टाँकों की कतार होती है, और यही कतार हवा में गेंद को दिशा देती है। इसलिए पहला काम यह है कि गेंद फेंकने से पहले सीम को सीधा रखने की आदत डालें। आप किसी भी साधारण नेट सत्र में देखेंगे कि पाँच में से तीन नए गेंदबाज़ों की सीम लड़खड़ाती हुई घूमती है, यानी गेंद "वॉबल" करती है। इसका सबसे सस्ता इलाज है कि अभ्यास में चमकदार, नई या कम घिसी गेंद इस्तेमाल करें और कलाई की स्थिति पर ध्यान दें। मैं आपसे सच कहूँ तो ग्रिप को ज़्यादा कस लेना सबसे आम गलती है, क्योंकि कसाव कलाई की हरकत रोकता है और रफ़्तार गिरा देता है। गेंद को ऐसे पकड़िए जैसे पक्षी को, कसकर नहीं, पर इतना कि उड़ न जाए।

इन ग्रिप को क्रम से आज़माइए:

  1. सीम अप (सीधी सीम): बेसिक ग्रिप, हर तेज़ गेंदबाज़ का आधार।
  2. ऑफ़-कटर या स्लो: शुरुआत में सिर्फ़ तब जब सीधी गेंद 70 प्रतिशत गेंदों पर लक्ष्य पर पड़ने लगे।
  3. यॉर्कर ग्रिप: सामान्य ग्रिप, पर रिलीज़ थोड़ी देर से।

hands gripping a red cricket ball with the stitched seam upright, shallow depth of field against a green field

इस चरण तक पहुँचे हैं तो अपनी रणनीति को और गहराई से समझने के लिए यह मार्गदर्शन आपके काम आएगा।

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चरण 4: लाइन और लेंथ पर पकड़ कैसे बनाएँ?

तेज़ गेंदबाज़ के लिए अच्छी लेंथ आम तौर पर स्टंप्स से लगभग 6 से 8 मीटर आगे पड़ने वाली गेंद है, और अच्छी लाइन चौथे या पाँचवें स्टंप के आसपास। रफ़्तार से पहले सटीकता ज़रूरी है, क्योंकि 10 में से 7 गेंदें एक ही जगह पड़ें तो बल्लेबाज़ गलती करता है।

लाइन-लेंथ सिखाने का सबसे सस्ता तरीका है पिच पर एक मीटर बाई एक मीटर का लक्ष्य, यानी टेप या रूमाल। 24 गेंदों में गिनिए कितनी गेंदें इस क्षेत्र में पड़ीं। शुरुआती स्तर पर 8 से 10 गेंदें लक्ष्य में पड़ना ठीक है, और 14 से ऊपर पहुँचने पर ही रफ़्तार बढ़ाने का अधिकार बनता है। यह अनुशासन ही वह चीज़ है जो क्लब स्तर और ज़िला स्तर में फ़र्क करती है। मैच देखते समय भी यह सबक मिलता है: Afghanistan A बनाम India A के 2026 के दूसरे मैच में प्रभसिमरन सिंह 84 रन पर आउट हुए, जब ऑफ़ब्रेक मिडिल स्टंप की लेंथ पर थी और वे पैडल-स्कूप खेलने गए। स्कोर तब 167/3 था। मतलब, सही लेंथ पर पड़ी गेंद एक सेट बल्लेबाज़ को भी जल्दबाज़ी में डाल देती है, फिर चाहे वह स्पिनर की हो या तेज़ की। मैं यह सब इसलिए बताता हूँ कि आप भी जान लें कि विकेट अक्सर रफ़्तार से नहीं, दोहराई गई सटीकता से मिलते हैं।

अभ्यास के लिए यह तालिका रखिए:

  • पहला हफ़्ता: 24 गेंदें, लक्ष्य 8 या उससे ज़्यादा।
  • दूसरा और तीसरा हफ़्ता: 24 गेंदें, लक्ष्य 10 से 12।
  • चौथा हफ़्ता: गेंदें 30 तक, पर हर सत्र के बीच 48 घंटे का आराम।

इन आँकड़ों और मैच विश्लेषण पर और पढ़ना हो तो हमारी [Internal Link: बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी रणनीति की गाइड] देखें।

चरण 5: सत्यापन, कैसे जाँचें कि सुधार असली है?

सुधार असली तब है जब तीन चीज़ें साथ में बेहतर हों: लक्ष्य पर पड़ने वाली गेंदों की संख्या, रन-अप का फैलाव और सत्र के बाद की थकान। सिर्फ़ रफ़्तार बढ़ना सबूत नहीं है, क्योंकि वह खराब एक्शन और चोट के जोखिम के साथ भी बढ़ सकती है।

निवेशक की भाषा में कहें तो गेंदें आपका "टर्नओवर" हैं और चोट आपका "ड्रॉडाउन"। स्पोर्ट्स साइंस में वर्कलोड की चर्चा में एक्यूट-क्रॉनिक अनुपात आम है, यानी पिछले सप्ताह का भार और पिछले चार हफ़्तों के औसत भार की तुलना। शोधकर्ता आम तौर पर 0.8 से 1.3 के बीच के अनुपात को सुरक्षित क्षेत्र मानते हैं, और अचानक 1.5 के आसपास पहुँचने पर चोट का जोखिम तेज़ी से बढ़ने की बात कहते हैं। आसान शब्दों में: एक हफ़्ते में अपनी गेंदें 30 प्रतिशत से ज़्यादा मत बढ़ाइए। एक नोटबुक रखिए, उसमें तारीख, गेंदों की गिनती, लक्ष्य पर पड़ी गेंदें, कमर या कंधे की अकड़न (1 से 10 के पैमाने पर) और नींद के घंटे दर्ज कीजिए। जी हाँ, यह बोरिंग है। पर जो लोग हर दिन की एंट्री से कतराते हैं, वही तीसरे महीने में फिज़ियो की लाइन में दिखते हैं।

हर चार हफ़्ते बाद यह चेकलिस्ट भरिए:

  1. क्या रन-अप का फैलाव 10 सेंटीमीटर से नीचे है?
  2. क्या 24 में से कम से कम 12 गेंदें लक्ष्य पर पड़ीं?
  3. क्या वीडियो में अगला कंधा गेंद छोड़ने तक लक्ष्य की तरफ़ है?
  4. क्या सत्र के बाद दर्द का स्कोर 3 से नीचे रहा?

सब हाँ हैं तो अगले चरण पर जाइए। कोई भी "नहीं" है तो वापस उसी चरण में लौटिए।

a coach holding a notebook and stopwatch beside a young bowler at an outdoor academy net session, evening light

अपनी प्रगति दर्ज करने के बाद अगला कदम सीखने के भरोसेमंद स्रोतों के साथ जुड़ना है, यहाँ से आगे देखें।

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आम गलतियाँ कैसे सुधारें?

तेज़ गेंदबाज़ी की सबसे आम गलतियाँ हैं: बहुत लंबा रन-अप, कसकर पकड़ी गई गेंद, अगली बाजू का जल्दी खुल जाना और रोज़ ज़रूरत से ज़्यादा गेंदें डालना। ज़्यादातर का इलाज रन-अप छोटा करना, वीडियो जाँच करना और गेंदों की संख्या घटाना है।

एक-एक कर लें। पहली गलती: गेंद लगातार लेग साइड में जा रही है। यह अक्सर इसलिए होता है कि अगला कंधा जल्दी खुल रहा है, इसलिए अगली बाजू को लक्ष्य की ओर ज़्यादा देर तक रोकिए। दूसरी गलती: बार-बार नो-बॉल। रन-अप 2 कदम छोटा करके 10 गेंदों वाला पैमाइश टेस्ट दोहराइए। तीसरी गलती: गेंद लगातार पुल-लेंथ पर पड़ रही है, यानी बहुत छोटी। ऐसा अक्सर तब होता है जब गेंदबाज़ रिलीज़ पर पीछे झुक जाता है, इसलिए गेंद छोड़ते समय सिर को आगे ले जाने पर ज़ोर दीजिए। चौथी गलती: रफ़्तार नहीं बढ़ रही। मैं आपसे सच कहूँ तो यहाँ मामला अक्सर कमज़ोर कोर और पिछली टाँग की ताकत का होता है, गेंदबाज़ी का नहीं। हफ़्ते में दो दिन प्लैंक, लंजेस और स्क्वैट्स जोड़िए। पाँचवीं गलती सबसे खतरनाक है: दर्द के बावजूद गेंद डालते रहना। पीठ में एक ही जगह दो सत्र लगातार दर्द हो तो गेंदबाज़ी रोकिए और फिज़ियो को दिखाइए। यह कोई सुझाव नहीं, मेरी शर्त है।

सारांश के लिए, यह सूची सुधार का काम आसान कर देगी:

  • गेंद लेग साइड में: अगली बाजू और कंधे की जाँच।
  • बार-बार नो-बॉल: रन-अप घटाएँ, फैलाव नापें।
  • गेंद बहुत छोटी: रिलीज़ पर सिर आगे।
  • रफ़्तार स्थिर: कोर और पैरों की ताकत।
  • लगातार दर्द: तुरंत विश्राम और जाँच।

और अगर आप नेट्स के अलावा आँकड़ों से सीखना चाहते हैं, तो हमारी [Internal Link: IPL तेज़ गेंदबाज़ों की समीक्षा] पढ़िए। हाल के सालों में 150 किमी/घंटा के आसपास डालने वाले भारतीय गेंदबाज़ जैसे उमरान मलिक (IPL 2022 में 157 किमी/घंटा) दिखाते हैं कि प्रतिभा के साथ नियंत्रण भी चाहिए। रफ़्तार अकेली टिकती नहीं।

तो फ़ैसला यह है कि हफ़्तों की गिनती, सटीकता का रिकॉर्ड और एक्शन की वीडियो जाँच, यही तीन औज़ार आपको सुरक्षित रखते हैं। पिच रिपोर्ट पर हम इसी तरह मैच समीक्षा, खिलाड़ी आँकड़े और रणनीति पर रोज़ लिखते रहते हैं, ताकि आप सिर्फ़ मेहनत नहीं, समझदारी से मेहनत करें। अब आपकी बारी है: कल सुबह 24 गेंदें, एक लक्ष्य और एक नोटबुक लेकर मैदान जाइए।

अपनी क्रिकेट समझ को अगले स्तर पर ले जाने के लिए आज ही शुरुआत करें।

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a row of cricket balls and a taped target square on a net pitch at dawn, empty practice ground behind

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: फास्ट बॉलिंग किसे कहते हैं?

A: फास्ट बॉलिंग वह गेंदबाज़ी है जिसमें गेंदबाज़ आम तौर पर 130 से 160 किमी/घंटा की रफ़्तार से गेंद डालता है और ज़्यादातर काम गेंद की गति और सीम मूवमेंट से लेता है। इसे मोटे तौर पर मीडियम-फास्ट (115 से 130), फास्ट (130 से 145) और एक्सप्रेस (145 से ऊपर) में बाँटा जाता है। Wikipedia की सबसे तेज़ गेंदों की सूची में शोएब अख़्तर की 161.3 किमी/घंटा की गेंद सबसे ऊपर दर्ज है।

Q: शुरुआती लोग फास्ट बॉलिंग कैसे शुरू करें?

A: शुरुआत 8 से 10 कदम के रन-अप, छोटे सत्र और सिर्फ़ 24 गेंदों से करें। पहले चार हफ़्ते रन-अप का फैलाव 10 सेंटीमीटर से नीचे लाएँ, फिर एक मीटर के लक्ष्य पर गेंदें डालें। रफ़्तार की चिंता बाद में कीजिए, क्योंकि पहले दो हफ़्तों में एक्शन सुधारने के कारण रफ़्तार थोड़ी कम होना सामान्य है। हर हफ़्ते गेंदों की संख्या 30 प्रतिशत से ज़्यादा न बढ़ाएँ।

Q: क्या सिर्फ़ रफ़्तार से विकेट मिलते हैं, या सटीकता ज़्यादा ज़रूरी है?

A: सटीकता ज़्यादा ज़रूरी है, खासकर शुरुआती और क्लब स्तर पर। 120 किमी/घंटा की गेंद अगर लगातार सही लाइन-लेंथ पर पड़े तो बल्लेबाज़ गलती करता है, जबकि 140 की बेकाबू गेंद चौके बाँटती है। पहले 24 में से 12 गेंदें लक्ष्य पर पड़ने लगें, तब रफ़्तार बढ़ाने का सोचिए।

Q: फास्ट बॉलिंग सीखने में कितना खर्च आता है?

A: बुनियादी स्तर पर खर्च कम है: कुछ क्रिकेट गेंदें, टेप, एक स्मार्टफोन और अच्छे बॉलिंग शूज़ काफ़ी हैं। शूज़ की कीमत आम तौर पर 1,500 से 5,000 रुपये के बीच रहती है, जबकि अकादमी की फीस शहर के अनुसार अलग-अलग होती है। एक फिज़ियो या कोच से शुरुआत में कम से कम एक बार एक्शन की जाँच कराना सबसे अच्छा निवेश है।

Q: फास्ट बॉलिंग में पीठ या कंधे में दर्द हो तो क्या करें?

A: दर्द हो तो गेंदबाज़ी तुरंत रोकिए और फिज़ियो या खेल-चिकित्सक को दिखाइए। दो सत्र लगातार एक ही जगह दर्द रहे तो इसे हल्के में न लें, क्योंकि पीठ का स्ट्रेस फ्रैक्चर महीनों बाहर बैठा सकता है। वापसी धीरे करें: पहले 50 प्रतिशत गेंदें, फिर हर हफ़्ते थोड़ी बढ़ोतरी, और साथ में कोर मज़बूत करने के अभ्यास।

Q: क्या स्पिन और तेज़ गेंदबाज़ी की सटीकता का अभ्यास एक जैसा होता है?

A: सिद्धांत एक ही है, पर तेज़ गेंदबाज़ी में शरीर पर भार कहीं ज़्यादा पड़ता है। दोनों में लक्ष्य-आधारित अभ्यास और रिकॉर्ड रखना काम आता है, जैसे Afghanistan A बनाम India A के 2026 के मैच में ऑफ़ब्रेक की लेंथ ने एक सेट बल्लेबाज़ को परेशान किया। फ़र्क बस इतना है कि तेज़ गेंदबाज़ को रन-अप और रिकवरी पर ज़्यादा ध्यान देना पड़ता है।

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पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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पिच रिपोर्ट · Editorial Archive · No. 01

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